Baby Gas Problem Solution In Hindi | Stomach Gas Relief

Baby Gas Problem Solution In Hindi - आपके बच्चे के पेट में  गैस की समस्या होना स्वाभाविक सी बात होती है। मगर आपको खियाल रखना चाहिए कि इसके कारण आपके बच्चे को कोई  ज्यादा परेशानी तो नहीं हो रही।अक्सर बच्चो को होने वाले गैस की  आवाज सुनकर Mother Father चौंक तो जाते हैं। कुछ बच्चों को गैस निकलने में तो  कोई दिक्कत नहीं होती है। अगर आपका बच्चा खुश है और सिर्फ गैस पास करते समय ही थोड़ा परेशान होता है तो इसमें कोई परेशानी वाली बात नहीं है।  यह सामान्य होता ही  है। मगर कुछ बच्चों को गैस से काफी परेशानी हो सकती है। आइए जानते है की Baby Gas Problem Solution In Hindi, में गैस को कैसे पहचाने और इसको दूर करने के लिए क्या उपाय  आजमा  सकते है ।

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आपका शिशु  रोते Time और यहां तक कि सांस लेते Time भी हवा को अंदर गटक सकता है। गैस अंदर जाने से शिशु को पर्याप्त दूध पीए बिना ही पेट भरा-भरा सा महसूस होता है। पेट के अंदर गैस होने से शिशु को बहुत असहजता महशुस हो सकती है। कई बार दूध या भोजन अच्छी तरह न पच पाने की वजह से भी अत्याधिक हवा बन सकती है। आंतों में सामान्यत  मैजूद  बैक्टीरिया दूध या भोजन को फर्मेंट कर सकते हैं।  जिससे ज्यादा गैस बनती है। जो  शिशुओं में यह समस्या होती है। वे बीमार हो  सकते हैं, और उनका वजन भी सही से नहीं बढ़ता। आइये जानते है, Baby Gas Problem Solution In Hindi, में और आपको कुछ इन्फॉर्मेशन देते है।


Baby Gas Problem Solution In Hindi - Stomach Gas Relief

1. आपको कैसे पता चलेगा कि शिशु को गैस हो गई है - How Do You Know That The Baby Has Gas
दूध पीते समय आपका बच्चा बोतल को चूसना छोड़ सकता है।  या रोना शुरु कर सकता है या फिर हो सकता है वह दूसरे स्तन से Doodh Peene Ko Taiyaar न हो। वह कसमसाने और मुंह बनाने लग सकता है।  खासकर कि यदि आप उसे दूध पिलाने के बाद लिटाने का प्रयास करें तो। जिन शिशुओं के पेट में गैस बनती है वे अपनी टांगे उपर उठाकर फैलाते हैं और अपनी पीठ को चापाकार में मोड़ते हैं। ये लक्षण कॉलिक या रिफ्लक्स के भी हो सकते हैं।

पहले तीन महीनों में शिशुओं में गैस होना आम है। क्योंकि तब उनकी Intestines पूरी तरह विकसित हो रही होती हैं। छह से बारह महीने ​के Infants में भी ये आम बात  है। क्योंकि वे बहुत से अलग-अलग भोजना पहली बार आजमा रहे होते हैं।

2. स्तनपान करने वाले शिशुओं को गैस होती है - Breast-Feeding Babies Have Gas
स्तनपान करने वाले शिशुओं में बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में कम गैस बनती है। स्तनपान करने वाले शिशु स्तन से दूध के प्रवाह को नियंत्रित कर सकते हैं। इसलिए वे Slow Slow Milk चूसते हैं। जिससे दूध के साथ कम हवा अंदर जाती है। स्तनपान करने वाले शिशुओं की कम अवधि के लिए और बार-बार दूध पीने की संभावना होती है। उन्हें Seedhe Bithaakar Bhee Doodh पिलाया जा सकता है। इन सबसे शिशु के पेट में कम गैस जाती है। हालांकि स्तनपान करने वाले शिशुओं को फिर भी हर बार दूध पिलाने के बाद डकार दिलवाने की जरुरत होती है। खासकर उन परिस्थितियों में, जब आपका शिशु बहुत जल्दी जल्दी स्तनपान करता हो या फिर आपके दूध का प्रवाह विशेषत Fast हो।

स्तनपान करने वाले शिशुओं में गैस होने की वजह आपके आहार में मौजूद प्रोटीन के प्रति असहिष्णुता हो सकती है। इस आहार को पहचानकर इसका सेवन बंद करने से मदद मिल सकती है। स्तनपान करवाने वाली मां के आहार में शामिल डेयरी उत्पाद भी इसका कारण हो सकते हैं। कुछ सब्जियाों जैसे Cabbage, Cabbage, Green Cabbage, Kidney Beans, Kidney Beans छोलों को गैस और कॉलिक का कारण माना जाता है। हालांकि, इस बारे में प्रमाण इतने प्रबल नहीं है।

अपने आहार को इतना भी सीमित न करें कि शिशु को भोजन के प्रति संवेदनशीलता होने लगे। मगर यदि आपको लगे कि को विशेष Food To Baby दिक्कत पहुंचा रहा है तो आप उसे अपने आहार से हटाकर देख सकती हैं।

3. शिशु  या बच्चे को  डकार कैसे दिलाएं - How To Give Birth To Baby Or Baby
अगर, आपका शिशु आराम से दूध चूस रहा है, तो उसे डकार दिलवाने के लिए बीच में न रोकें। ऐसा करने पर वह शायद रोने लगे, जिससे और अधिक हवा उसके पेट में जाएगी। शिशु जब खुद ही दूध पीते-पीते बीच में रुके, तब आप उसे डकार दिलवा सकती हैं।

बोतल से दूध पीते हुए जब शिशु निप्पल को छोड़ दे या फिर जब आप एक स्तन के बाद दूसरे स्तन से दूध पिलाने लगें, तो आप उसे डकार दिलवा सकती हैं। इसके बाद जब वह पूरा दूध पी चुका हो, तब उसे दोबारा डकार दिलाएं। शिशु को आमतौर पर तीन मुद्राओं में डकार दिलवाई जाती है। आप इन तीनों को ही आजमा कर देखें, हो सकता है एक की बजाय आपके दूसरी मुद्रा ज्यादा बेहतर लगे।

4. शिशु कंधो के ऊपर - Baby On The Shoulders, Baby Gas Problem Solution In Hindi
शिशु को अपने कंधें पर लगाएं और उसके नितंबों को अपनी बाजू से सहारा दें। दूसरे हाथ से उसकी पीठ को थपथपाएं या मलें। चूंकि आपका शिशु तना हुआ और सीधा होता है, यह अवस्था शिशु को डकार दिलवाने के लिए अक्सर सबसे आसान मानी जाती है।

5. बैठाकर डकार करवाना  - To Sit Down
शिशु को अपनी गोद में इस तरह बिठाएं, कि उसकी पीठ आपके पेट का सहारा लिए हुए हो। शिशु की एक बाजू के नीचे से अपना हाथ निकालते हुए सहारा देकर शिशु को हल्के से आगे की ओर झुकाएं। अपने खुले हाथ से शिशु की ठोड़ी को थामें। दूसरे हाथ से शिशु की Peeth Ko Thapathapaen या मलें। आपकी गोद में मुंह नीचे की तरफ करके: शिशु का मुंह नीचे की तरफ करके अपनी गोद में लिटाएं। उसे एक हाथ से कसकर पकड़े रहें और दूसरे हाथ से उसकी पीठ को हल्के हल्के मलें।

6. गरम पानी जरूर से पिलाएं - Warm Hot Water
जब भी आपका बेबी गैस सी पी‍डि़त हो, तब उसे गरम पानी पिलाएं। Bach‍che Ka Gala  बहुत ही संवेदशील होता है इसलिये उसे तेज गरम पानी न पिलाएं। चाहें तो बच्‍चे को गरम पानी से नहला भी सकती है, इससे गैस दूर हो जाती है।

5. फारमूला मिल्‍क बिलकुल  न दें - Do not give milk at all
अगर आपको लगता है कि Phaaramoola Mil‍ka पीने के बाद आपके बच्‍चे के पेट में गैस बन जाती है तो उसे यह न पिलाएं। कभी-कभी बच्‍चे को इस प्रकार का दूध पचाने में समय लगता है। इस दूध में कुछ ऐसी सामग्रियां मिली रहती हैं जो पेट में गैस बनाती हैं।

यह जानकारी आपको कैसा लगा और आप अपने "Baby Gas Problem Solution In Hindi'' में कर  सकते है। अगर आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो हमें कमेंट करके जरूर से बताये।  


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