प्रेणा के पुष्प हिंदी में, कुछ रोचक कहानियाँ

Prena Ke Pushp, Love flower - प्रेणा के पुष्प के बारे में व् इस आर्टिकल में आपको कुछ Prena और कहानी ,मिलेगी जिसे आप कुछ सीख सके। सर्दियों का मौसम था, सुबह का वक्त चारो ओर कोहरा ही कोहरा एक शेर का बच्चा सिमटकर गोल मटोल बना जामुन के पेड़ के निचे सोया हुआ था। Idhar Bhaaloo Saahab सैर पर निकल तो आये थे लेकिन पछता रहे थे। तभी उनकी नजर जामुन के पेड़ के निचे पड़ी। आँखो फैलाई,अक्ल दौड़ाई - आह Football सोचा चलो इससे Khelakar Kuchh Garmee हासिल की जाये। 

आव देखा न ताव भालू जी ने पैर से उछाल दिया शेर के बच्चे को। हड़बड़ी में शेर का बच्चा दहाड़ और फिर पेड़ की एक डाल पकड़ ली। मगर डाल टूट गई भालू शाहब जल्दी ही Maamala Samajh Gaye पछताये लेकिन अगले ही पल दौड़कर फुर्ती से दोनों हाथ बढ़ाये और शेर के बच्चे को लपक लिया। 

अब की बार शेर का वच्चा धड़ाम से जमीं पर आ गया डाल भी टूट गई। दभी माली वह आया और शेर के बच्चे पर बर्ष पड़ा दाल तो दी पेड़ की लाहो हर्जाना। शेर के बच्चे ने कहा जरा ठीक तो हो लूँ माली ने कहा ठीक है। मै अभी आता हु माली के वहाँ से जाते ही शेर का बच्चा भी नौ दो ग्यारह हो लिया उसने सोचा जान बची तो लाखो पाए। 

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Prena-Ke-Pushp-Hindi 

Prena Ke Pushp Hindi , Love flower

वृक्ष के बीज  - Tree seed
मनुष्य होने का सहज बोध यह है की हम ऐसे कार्य करे जिससे अधिक से अधिक लोगो को सुख और आनंद की अनुभूति हो। बुजुर्ग अगली पीढ़ी के लिए फलदार वृक्ष के बीज होते है वही एक बुजर्ग स्त्री अंजान राहो में सुन्दर पुष्पों, छायादार वृक्षो के बीज इस उम्मीद में बिखरती चलती है वह Rahe Na Rahe Aane Vaalee पीढ़ियों को इन पुष्पों और वृक्षो के उगने से सुंगंध और शीतलता मिलेगी।

एक बूढ़ा आदमी, जिसके बाल सफेद हो गये थे जमीं खोद रहा था। एक नौवजन ने उस बुजुर्ग को परिश्रम करते देखकर पूछा बा बाबा यह क्या कर रो हो। आम का Paudha Rop Raha Hu बूढ़े ने कहाँ, इस उम्र में इसके फल कब खाओगे, बाबा।

मै फल नहीं खा सकता तो क्या हुवा ब्य बेटा तुम तो खा सकोगे न, मेरे तुम्हारे नाती पोते तो खायेगे देखो वह अमराई मेरे दादा ने लगाई थी तो उसके फल मैंने खाये। मै यह आम का पौधा लगा रहा हूँ। इसके फल मेरे नाती पोते खायेगे। एक वृद्ध महिला रेलगाड़ी से सफर कर रही थी। खिड़की के पास बैठ कर बिच बिच में अपनी मुट्ठी से कुछ बाहर फेकती जा रही थी। एक सहयात्री ने पूछा,यह आप क्या फेक रही है। उस महिला ने जवाब दिया, ये सुन्दर फूलो और फलो के बिच है। मै इन्हे इस उम्मीद से फेक रही हूँ की इनमे से कुछ भी अगर जड़ पकड़ ले तो लोगो को इनसे कुछ फैयदा होगा। पता नहीं मै Is Raste Se Phir Gujaroo या न गुजरू, इसलिए क्यों न मई इस अवसर का उपयोग कर लूँ।

Prena Ke Pushp, Love flower

अमेरिका के वैज्ञानिक - American scientists 
बेंजामिन फ्रेंकलिन, के बारे में एक अनुकरणीय बात सुनी जाती है। उनके पास एक गरीब विद्यार्थी मदत मांगने के लिए आया। उन्होंने बीस डालर दिए।  वे तो यह छोटी सी रकम देकर भूला। जब उसके दिन फिरे, तब वः बीस डलर लैवटाने के लिए फ्रेंकलिन के पास आया। फ्रेंकलिन ने कहा मुझे तो याद  नहीं की मैंने यह Rakam Aapako Kab Dee थी। खैर आप इसे अपने ही पास रखिये और जब आपके पास कोई ऐसा ही जरूरतमंद आये तो उसे यह दे दीजियेगा उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया। कहते है ,Aaj Bhee Vah Rakam अमेरिका में जरूरतमदों के हाथो में घूम रही है।

स्वामी विवेकानंद  - Swami Vivekananda 
बेलूर मठ के निर्माण Kaary Aur Shikshaadaan के कार्य में बहुत व्यस्त थे। निरंतर भाग दौड़ और कठिन श्रम करने के कारण वे अस्वस्थ हो गये थे। चिकित्सको ने उन्हें वायु परिवर्तन  तथा विश्राम Karane Par Jor Diya, विवश होकर  दार्जलिंग काले गए। वहाँ उनके स्वस्थ में धीरे धीरे सुधर हो रहा था। तभी उन्हें समाचार मिला की कोलकाता में प्लेग व्यापक रूप में फ़ैल गया है। प्रतिदिन सैकड़ो लोगो की मृत्यू हो रही थी। यह दुखद समाचार सुनकर क्या महाप्राण विवेकानंद स्थिर रह सकते थे। वे  तुरंत कोलकाता लौट आये Aur Usee Din Unhonne प्लेग फोग में आवश्यक सावधानी बर्डन का जनसाधारण को उपदेश और ब्रम्ह्चारियो को लेकर वे रोगियों की सेवा में जुट गए। कोलकाता में भय तथा आतंक का राज्य फ़ैला था। स्त्री पुरुष  अपने बच्चो को लेकर प्राण बचाने के उद्देश्य से भागे जा रहे थे। ब्रिटिश सरकार ने प्लेग रोग के बचाव के सम्बंद Me Kathor Niyam Jaaree कर  दिया था। उससे लोगो में भरी असंतोस था। इस परिस्थिति का सामना करने की भरी चुनौती संवामी जी के सामने थी। इस कार्य में कितने Dhan Kee Aavashyakata Hogee और वह कहाँ से आएगा इस बात की चिंता कटे गुवे किसी गुरुभाई ने स्वामी जी से प्रश्न क्या, स्वामी जी रूपये कहाँ से आएंगे स्वामी जी ने तत्काल उत्तर दिया यदि आवशयकता ही तो मठ के लिए खरीदी गई जमीं बेच डालेंगे हजारो स्त्री पुरुष हमारी आखो के सामने असहनीय दुःख सहन करंगे और हम मठ में रहेंगे हम सन्याशी है। Aavashayakata Hogee To Phir वृक्षो के निचे रहेंगे,भिक्षा द्वारा प्राप्त अन्न वस्त्र हमारे लिए पर्याप्त होगा।

स्वामी जी - Swami ji
ने एक बड़ी सी जमीं किराये पर ली और वहाँ पर कुटिया निर्माण की गई,जाती व वर्ण विचार  छोड़, अहसाय प्लेग के मरीजों को वहाँ पर लाकर उत्शाही कर्यकर्तागण Seva Kaary Me Rat हुए। स्वामी जी स्वयं भी उपस्थित रहकर सेवा कार्य करने लगे। शहर की गंदगी साफ करने में, अवसधी का वितरण करने में दरिद्र नारायणों की अति उत्साह से सेवा करने में सभी कायकर्ता सच्चे मन से लग गए य्रत जिव तत्र शिव मंत्र के ऋषि विवेकानंद मृत्यु की कुछ भी परवाह न करते  हुवे स्वदेशवाशिओ को शिक्षा देने लगे  की किस प्रकार न्र को नारायण मान सेवा करना योग्य है। जिन डोम चण्डाल, मोची आदि से सदियों से तथाकथित ऊंची जाती के अभिमानी जन घृणा करते थे। Svaamee Jee Ne Unhee Ko Mere बही कहकर उनका आलिंगन किया।

तो आपको ये Prena Ke Pushp,आर्टिकल आपको कैसा लगा कमेंट करके जरूर से बताये।






















  
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