Bhediya Aur Bakri Ki Kahani,हिंदी में पढ़े

Bhediya Aur Bakri Ki Kahani - समूह संगठित अगर कोई भी समूह संगठित है तो वह अत्याचार,अन्याय और उत्पीड़न का डट कर मुकाबला करते हुवे उसे परास्त कर सकता है। लेकिन यह भी सच है। की पहल कोई एकाकी ही करता है। ऐसा ही एक पहल एक कहानी में एक युवा Bakri भेड़िये से डट कर मुकाबला करते हुवे मरती है। युवा बकरी मरने के भय से बाड़े में कैद होना स्वीकार नहीं करती। बल्कि वह हटियारे और निरीह बकरियों का खून करने वाले भेड़िये को धायल,पीड़ा और दर्द से छटपटाते हुए देकना चाहती थी। Bakaree Apane Aakraman से भेड़िये को लहूलुहान और घायल कर देती है, यह अवष्य होता है की इसमें वह अपने साथियो की अकर्मण्यता से कारण ढेर हो जाती है ,पर एक उदाहरण अवश्य रक् जाती है की Saahas Se Bharee सिर्फ एक Bakri  भी भेड़िया को घायल और घावों के सड़न  से मरने को बाध्य कर सकती है।

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Bhediya Aur Bakri Ki Kahani - Hindi 

हरे  भरे - Greenish
पहाड़ पर बकरियाँ चरने जाती है तो दूसरे तीसरे रोज एक न एक Bakri कम हो जाती। भेड़िये की इस धूर्तता से तंग आकर चरवाहे ने, वहाँ बकरिया Charaana Band Kar Diya और बकरिया ने भी मौत से बचने के लिए कैद रहकर जुगाली करते  रहना ही श्रेस्ट समझा। लेकिन न जाने क्यो एक युवा बकरी को यह बंधन पसंद नहीं आया। आत्याचारी से Kab Tak Praano की रक्षा की जा सकेगी ? वह पहाड़ से उतरकर Kisee Bhee Roj Baade में भी कूद सकता है। सीकरी के भय से मुर्ख सुतुर्मुग रेत में गर्दन छुपा लेता है। तब क्या सीकरी उसे बख्स देता है ? इन्ही विचारो से ओत - प्रोत वः हसरत बही नजरो से पर्वत की ओर देखती रहती। शथिनो ने उसे आँखो आँखो में समझने का प्रयास किया की वह ऐसे मूर्खतापूर्ण विचारो को न लाये। भोग्य सदैव से भोगने के लिए ही उत्पन्न होते रहते है। Bhediya के मुँह में हमारा कुन लग चुका है, वह अपनी आदत से सभी बाज नहीं आएगा।

लेकिन नई युवा बकरी - But new young goat
तो भेड़िये के  Khoon Ko Hee Dekhana चाहती थी। बह किस तरह छटपटाता है, यह करतब देखना की उसकी लालसा बलवती होती गई।  आखिर एक रोज मौका पाकर Baade Se Vah Nikal Bhaagee और पर्वत पर चढ़कर स्वछंद विचरती कूदती फांदती दिन भर पहाड़ पर चरति रही। मनमानी कुलेलें करती रही। भेड़िये को देखने की उसकी उत्सुकता Badhee Rahee, परन्तु उसके दर्शन नहीं हुए। झुटपुट होने पर लाचार, जब वह निचे उतरने को बाध्य होइ तो रस्ते में दबे पाँव भेड़िया आता हुवा दिखाई दिया उसकी रक्तजित आँखे लपलपाती जीभ और आक्रमणकारी Chaal Se Vah Sab Kuchh Samajh Gaee, भेड़िया मुस्कुराकर बोला, तुम बहुत सुन्दर और प्यारी मालूम होती हो। मुझे तुम्हारी जैसी साथिन की आवशयकता थी। मैं कई रोज से Akelaapan Mahasoos कर रहा था। आओ, तनिक साथ साथ पर्वत राज का सैर करे।बकरी को भेड़िये की बकवास सुनने की अवशर न था। उसने तनिक पीछे हटकर इतने जोर से टक्कर मारी की असावधान Bhediya संभल न सका यदि बीच का भारी पत्थर उसे Sahaara Na Deta तो आधे मुँह निचे गिर गया होता।

भेड़िये की जिंदगी - Wolf's life
में यह पहला अवशर था वह  किंकर्तव्यविमूढ़ सा हो गया। Takkar Khaakar अभी वह सम्भल भी नहीं पाया था की बकरी के पैने सींग उसके सीने में इतने जोर से लगे की वः चीख उठा, छत विछत साइन से लहू की बहती धारा देख भेड़िये  के पाफ उखड गये मगर एक निरीह बकरी के आगे भाग खड़ा होना उसे कुछ जचा नहीं वह भी Saahas Bator Kar पुरे वेग से झपटा Bakri तो पहले से ही सावधान थी वह कतार की एक ओर हट गई और भेड़िया का शिर दरख्त से टकराकर लहूलुहान हो गया।  लहू को देखकर अब भेड़िया के लहू में भी उबाल आ गया। वह जी जान से बकरी के ऊपर टूट पड़ा अकेली बकरी Usaka Kab Tak Mukaabala करती वह उसेक देवपेज देखने के लालसा और अपने अरमान पुरे कर चुकी थी साथियो की अकर्मण्यता पर तरस खाती हुई बिचारि ढेर हो गई। 

पेड़ पर बैठे हुवे तोते - Parrot 
ने मुस्कुराकर मैना से पूछा भेड़िये से भिड़कर Bhala Bakri Ko क्या मिला।
मैना ने सगर्व उत्तर दिया वही जो अत्याचारी का सामना करने पर पीड़ितों को मिलता है Bakri मर जरूर गई परन्तु भेड़िये को घायल करके मरी वह भी अब दूसरे पर अत्याचार करने के लिए अब जीवित नहीं रह सकेगी साइन और मस्तक के घाव उसे सड़ सड़कर मरने को बाध्य करंगे कास Bakri को अन्य साथियो ने उसकी भावनाओ को समझा  होता।

छिपने के बजाय Ek साथ वार किया Hota तो वे आज बाड़े में कैदी जीवन व्यतित Karne के बजाय पहाड़ पर निशंक और स्वछंद विचरती होती। तोता अपना सा मुँह Lekar चुप चाप शहीद बकरी की और देखने लगा।

तो आपको ये Bhediya Aur Bakri Ki Kahani Kaisi लगी आई होप की आपको ये कहानी अच्छी लगी हो।
















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